महादेव शंकर हैं जग से निराले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

महादेव शंकर हैं जग से निराले,

बड़े सीधे साधे बड़े भोले भाले।

मेरे मन के मदिर में रहते हैं शिव जी,

यह मेरे नयन हैं उनही के शिवालय॥

बनालो उन्हें अपने जीवन की आशा,

सदा दूर तुमसे रहेगी निराश।

बिना मांगे वरदान तुमको मिलेगा,

समझते हैं वो तो हरेक की मन की भाषा॥

वो उनके हैं जो उनको अपना बनाले...

जिधर देखो शिव की है महिमा निराली,

यह दाता है और सारी दुनिया सवाली।

जो इस द्वार पे अपना विशवास कर ले,

तो पल भर में भर जायेगी झोली खाली॥

उनही के अँधेरे, उनही के उजाले...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।