तू बेअंत तेरा अंत ना जाना

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॥ पावन पाठ ॥

सच्चे पातशाह मेरी बक्श खता मैं निमाना,

तू बेअंत तेरा अंत ना जाना,

दीन छोड़ दुनि संग लगा,

तेरा नाम ना जपेया भागा,

कोई गन न पल्ले नरक न मैनु झले,

पाप कमाना,

तू बेअंत तेरा अंत ना जाना

दर तेरे सवाली जो आवे मुहो माँगियां मुरादा ओ पावे,

मैं भी आया शरणी मैनु लावो चरनी विर्ध बिशाना,

तू बे अंत तेरा अंत न जाना,

तर गये पापी नाम रट के,

कटी चौरासी नाम जपके,

विसर नाही दातार बक्शो मेरे करतार दर्श दिखाना,

तू बेअंत तेरा अंत ना जाना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।