काली कमली ने ऐसा रंग डाला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

काली कमली ने ऐसा रंग डाला,

के रंग कोई चडता नहीं।

रूप भी काला रंग भी काला,

फिर भी गज़ब कर डाला।

काले रंग ने दीवाना कर डाला,

के रंग कोई चडता नहीं॥

वह सुन्दर रूप विलोक सखी मन हाथ से मेरो भगो सो भगो,

चित्त सांवरी मूरत देखते ही हरी चन्द्र जो जाए पगो सो पगो।

हमे औरन से कछु काम नहीं अब तो जो कलंक लगो सो लगो,

रंग दूसरो और चडोगो नहीं, सखी सांवरो रंग रगों सो रंगों॥

टेढ़ी चित्तवन टेढ़ी अदा है,

जिस पे दिल यह फ़िदा है।

श्याम प्यारे ने ऐसा जादो डाला,

के रंग कोई चडता नहीं॥

मोहन नैना आपके नौका के आकार,

जो जन इनमे बस गए तो हो गये भव से पार।

तेरे नैना कारे कारे,

हम पे जादू डारे।

तेरी नजरो ने हमे मार डाला,

के रंग कोई चडता नहीं॥

ऐसा रंग डाला मेरा सब कुछ रंग गया।

और रंग धुल गए इक श्याम रंग चढ़ गया॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।