जदो दुनिया ने आँख मेतो फेरी

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॥ पावन पाठ ॥

जदो दुनिया ने आँख मेतो फेरी,

गुरां ने मेरी बाह फड़ लई,

मेरी तार दिति दुभि दी होइ बेड़ी,

गुरां ने मेरी बाह फड़ लई,

ठोकर वि मरियाँ सी जदो ऐ समाज ने,

दिगदा उठाया पंक्षी मेरे महाराज ने,

सिर झुल्दी सी दुखा दी हनेरी,

गुरां ने मेरी बाह फड़ लई,

रेहमत ओह्दी दा किंज करा शुकराना मैं,

कौन मेरे गुरु जेहा घूमिया ज़माना मैं,

मैनु तारया रता ना लाइ देरी,

गुरां ने मेरी बाह फड़ लई

जांदा सी कौन तेरे बचड़े निमाने न,

चरनी लगा के मान दिता सेवादार न,

बिना नाम दे घडी न लेंगे मेरी,

गुरां ने मेरी बाह फड़ लई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।