ऐ प्रीत कदे छुटनी नहीं

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॥ पावन पाठ ॥

ऐ प्रीत कदे छुटनी नहीं,

ऐ डोर कदे टूटनी नहीं,

साह मुकदे ते मूक जावन,

मैं तेरा दर छड़ दी नहीं,

ऐ प्रीत कदे छुटनी नहीं....

तेरे दर ते आ गई आ,

हुन लेके आसा मैं,

जे तू वि नहीं रखाया,

फिर किस वाल जावा मैं,

मैनु तेरा ही सहारा है,

तू मुख कदे मोड़ी ना,

ऐ प्रीत कदे छुटनी नहीं....

मैनु लेखे विच लावो जी,

खैर नाम वाली पावो जी,

झोली अड़ के मैं बैठी हां मैनु ऐवे ना रुलाऊ जी,

सदा तेरे बिन दुनिया विच कोई होर सहारा नहीं,

ऐ प्रीत कदे छुटनी नहीं...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।