दुनिया ना भाए मोहे अब तो बुला ले

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॥ पावन पाठ ॥

दुनिया ना भाए मोहे अब तो बुला ले

चरणों में चरणों में तेरे चरणों में चरणों में

मेरे गीत मेरे संग सहारे,

कोई ना मेरा संसार मेरे

दिल के यह टुकड़े कैसे बेच दूँ, दुनिया के बाज़ार में

मन के यह मोती रखियो तू संभाल के,

चरणों में चरणों में तेरे चरणों में चरणों में

सात सुरों के सातों सागर,

मन की उमंगो से जागे

तुहो बता मैं कैसे गाऊं

बहरी दुनिया के आगे

तेरी यह वीणा अब तेरे हवाले

चरणों में चरणों में तेरे चरणों में चरणों में

मैंने तुझे कोई सुख ना दिया

तूने दया लुटाई दोनों हाथों से

तेरे प्यार की याद जो आये,

दरद चालक जाए आँखों से

जीना नहीं आया मोहे अब तो छिपा ले

चरणों में चरणों में तेरे चरणों में चरणों में

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।