चलिए शिव के दवारे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सावन आइयो रे चलिए शिव के दवारे,

कवर कंधे धर के ओ गंगा जल भर के,

अरे बोल के सब जैकारे,

सावन आइयो रे चलिए शिव के दवारे,

सावन में भोले जी को कावर जो चढ़ाते है,

एक लोटा गंगा जल से भोले खुश हो जाते है,

दया उस पर करते ओ भोले भण्डार भरते,

कई बिगड़े भाग सवारे,

सावन आइयो रे चलिए शिव के दवारे,

शिव जी है भोले भाले वर देते मनमानी,

तीनो लोको में ऐसा कोई ना है दानी,

पार भाव से करते पल में दुखड़े हर ते,

कई डुब्दै पार उतारे,

सावन आइयो रे चलिए शिव के दवारे,

शिव लिंग पे बेल पतरी,

फूल फल चढ़ा देना,

थोड़ा सा चन्दन गिसके शिव लो लगा देना,

काम तेरा हो जायेगा,

जो मांगे मिल जायेगा,

तेरे हो जाये उचे वारे न्यारे,

सावन आइयो रे चलिए शिव के दवारे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।