कट प्रीता नाल चरखा सिमरन दा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कट प्रीता नाल चरखा सिमरन दा,

बड़े ही भागा नाल मिलिया हीरे मोतियां नाल जड़ियाँ,

चढ़ी जवानी सिर ते तेरे न तंद सिमरन दा तू फड़ियां,

सूती पई तू गहरी नींदे सिर ते सूरज चड्या चरखा सिमरन दा,

कट प्रीता नाल चरखा सिमरन दा,

पूछ सहेलियां तेरियां ने ता कत कत ढेर लगाया,

कत कत सिमरन दे तंद न ध्यान दी अती बनाया,

सूती दी तू सूती रहियो सूती न दिन चढ़ आया चरखा सिमरन दा,

कट प्रीता नाल चरखा सिमरन दा,

वडी दिति सतगुरु ताहि नाम दा चीर बनाया,

रह गई तू सूती दी सूती नहीं लेके कुछ पाया,

की मुख लेके जावे गी जद लारा मौत दा आया,

चरखा सिमरन दा...

तड़के सार तू उठ के भेहणे सिमरन दी माला बना ले,

गुरा दा नाम तू लेके अपने दुखड़े सारे मुका ले,

अंत वेले एही कम आना बाकी सब लूट जाना,

चरखा सिमरन दा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।