भाल पे चन्दर माँ

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

इसे लेहरा के गंगा जटा से बही,

दृश्य ऐसा हुआ है ना होगा कही,

मानो ऐसा लगा जैसे बरसी घटा,

देख के ये छटा तो मजा आ गया,

भाल पे चन्दर माँ कंठ में नील माँ,

देखा जोगी जो ऐसा मजा आ गया,

मनो ऐसा लगा जैसे बरसी घटा

देख के ये छटा तो मजा आ गया,

नाग विष धर गले में लवटे हुए,

सारी सृष्टि स्वयं पे समेटे हुए,

त्रि नैन में वसा त्रिववं का नशा,

इसमें जो डूबा मजा आ गया,

भाल पे चन्दर माँ कंठ में नील माँ,

प्रकृति और पुरष गोरी शंकर बने,

हुए जब एक अरधनैश्वर बने,

आधा तन गोरी का आधा तन भोले का,

देख अद्भुत नजारा मजा आ गया,

भाल पे चन्दर माँ कंठ में नील माँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।