नख पे गिरिवर लीनो धार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नख पर गिरिवर लीनो धार, कन्हैया मेरो बारो,

कन्हैया मेरो बारो,कन्हैया मेरो बारो ।

नख पर गिरिवर लीनो धार, कन्हैया मेरो बारो,

यूँ कहे यशोदा मैया, सब ज़ोर लगाओ भैया,

अरी यह कैसे झेले भार, कन्हैया मेरो बारो,

कन्हैया मेरो बारो,कन्हैया मेरो बारो ।

नख पर गिरिवर लीनो धार, कन्हैया मेरो बारो,

कन्हैया मेरो बारो,कन्हैया मेरो बारो ।

मेरे लाल की नरम कलाईआं, देखो मुड़ ना जावे भैया,

अरी गिरिवर भार अपार, कन्हैया मेरो बारो,

कन्हैया मेरो बारो,कन्हैया मेरो बारो ।

नख पर गिरिवर लीनो धार, कन्हैया मेरो बारो,

कन्हैया मेरो बारो,कन्हैया मेरो बारो ।

जब कोप इंद्र ने कीनो, गोवेर्धन नख पे लीनो,

बादल बरस बरस गए हार, कन्हैया मेरो बारो,

कन्हैया मेरो बारो,कन्हैया मेरो बारो ।

नख पर गिरिवर लीनो धार, कन्हैया मेरो बारो,

कन्हैया मेरो बारो,कन्हैया मेरो बारो ।

यूँ कहे पूछरी वारो, लाठी को दियो सहारो,

अरे मन भज ले कृष्णा मुरार, कन्हैया मेरो बारो,

कन्हैया मेरो बारो,कन्हैया मेरो बारो ।

नख पर गिरिवर लीनो धार, कन्हैया मेरो बारो,

कन्हैया मेरो बारो,कन्हैया मेरो बारो ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।