चली जा रही है किनारे किनारे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

चली जा रही है किनारे किनारे,

मेरी नाव साई जी तेरे सहारे,

ज़ेहन में भी तू है जुबा पे भी तू है,

मेरे सपनो के आशिया में भी तू है,

मेरी धड़कने बस तुझे ही पुकारे,

मेरी नाव साई जी बस तेरे सहारे..

दिया तूने जितना ये तेरा कर्म है,

तेरी किरपा से ही मेरे दम में दम है

मेरी सांसे चलती है तेरे सहारे,

चली जा रही है किनारे किनारे...

तेरा दास हु मैं मैं तेरा भिखारी,

तू मेरा है बाबा मैं तेरा पुजारी,

पड़ा हु शरण में खड़ा तेरे द्वारे,

चली जा रही है किनारे किनारे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।