रब मेरे सतगुरु बनके आये

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

रब मेरे सतगुरु बनके आये मत्था टेक लैन दे,

मैनु वेख लैन दे मत्था टेक लैन दे,

चिटा चोला खुलिया बहवा ,

उसदे रूप दे सदके जावा,

इसदे मुखड़े दा चमकारा मैनु वेख लैन दे,

रब मेरे.......

सूखे बूटे हरे ओह करदा,

झोलिया फुल्ला नाल है भरदा,

नी ओह केहड़ा माली आया मैनु वेख लैन दे

रब मेरे......

सतगुरु मेहर दी नज़र है पानदे,

डूबदे पत्थर वी तर जांदे,

नी ओह केहड़ा तारण आया मैनु वेख लैन दे,

रब मेरे.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।