इक तारा इक रुक्मण दोनों ही माँ की पुजारन

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

इक तारा इक रुक्मण दोनों ही माँ की पुजारन,

अंतर क्या है दोनों ही बहनों में बोलो,

इक राजकुमारी इक भाग्य की मारी।

इक जब पैदा हुई तो घर घर बजने लगी शेहनाई,

इक जब पैदा हुई तोह नदिया बीच बहाई।

इक गाये इक रोये इक पाए इक खोये,

अंतर क्या है दोनों ही बहेनो में बोलो,

इक खुशी मनाये इक ठोकर खाए॥

इक राजा के संग गयी बिआही बन गयी महलों ही रानी,

इक कुतिया की बनी रौशनी रानी की नौकरानी।

इक रानी इक दासी दोनों की आत्मा प्यासी,

अंतर क्या है दोनों ही बहेनो में,

इक जगन रचाए इक बचन निभाए॥

तारा रानी की कथा का सार यही है,

उंच नीच का भेद न समझे साचा प्यार वही है।

तारा की अमार कहानी यु तो है सदीओ पुरानी,

अंतर क्या है दोनों ही कथा में,

इक चंचल ने सुनाई इक भक्तों ने सुनाई॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।