शिरडी में जो जाते हैं

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॥ पावन पाठ ॥

रातो को उठ उठ कर जो ध्यान लगाते है,

मस्ती में वो रंग जाए शिरडी में जो जाते है,

साई नाम में जो डूबा उसे खबर नहीं जग की,

सजदे में जो दर आके बस सिर को झुकाते है,

मस्ती में वो रंग जाए शिरडी में जो जाते है,

बेदर्द ज़माने का उसे डर क्या सताये गा,

शरधा से जो घर आके इसे अपना बनाते है,

मस्ती में वो रंग जाए शिरडी में जो जाते है,

इस चौखठ से कोई मायूस नहीं लोटा,

चरणों की धूलि को जो मस्तक से लगाते है,

मस्ती में वो रंग जाए शिरडी में जो जाते है,

जन्नत से भी बढ़ कर के ये धाम निराला है,

केवल वो तरे भव से जो मुँह विसराते है,

मस्ती में वो रंग जाए शिरडी में जो जाते है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।