मिल गये मिल गये आज मेरे मोहन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मिल गये मिल गये आज मेरे मोहन ,

आज मेरे ज़मीन पर नहीं है कदम,

मिल गये मिल गये आज मेरे मोहन ,

मेरी किस्मत की चाभी तेरे हाथ है,

खोलो खोलो मुकदर तो क्या बात है,

कर दियाँ तूने रहमो कर्म,

आज मेरे ज़मीन पर नहीं है कर्म,

मिल गये मिल गये आज मेरे मोहन ,

मेरी हर साँस करती तेरा शुकरियाँ,

मेरे श्याम ने मुझको सब कुछ है दिया,

खुल गये खुल गये आज मेरे कर्म,

आज मेरे ज़मीन पर नहीं है कर्म,

मिल गये मिल गये आज मेरे मोहन ,

कई जन्मो से तेरा मेरा साथ है,

मेरे सिर पर प्रभु जी तेरा हाथ है,

खिल गया खिल गया मेरा भोला सा मन,

आज मेरे ज़मीन पर नहीं है कदम,

मिल गये मिल गये आज मेरे मोहन ,

तेरी किरपा से हम मालो माल हुए,

तेरी सूरत को देख निहाल हुए,

खिल गया खिल गया मेरे मन का चमन,

आज मेरे ज़मीन पर नहीं है कर्म,

मिल गये मिल गये आज मेरे मोहन ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।