शिव जी डमरू तेरा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सुन सुन भोले नाथ दा आज दिल नही सड़ा रज दा,

शिव जी डमरू तेरा आज डम डम वजदा,

डमरू जद तेरा बजन लगियां भगता जशन मनाया,

आन विराजो भंडारी जी भगता जगन रचाया,

हाथ जोड़ के विनती करदे तू रखवाला है जग दा,

शिव जी डमरू तेरा आज डम डम वजदा,

विच जटा दे गंगा बेह्न्दी सोहना रूप बनाया,

तन ते भसम रमाई भोले लंगोट सिखल दा पाया,

शेष नाग दी माला गल विच माथे मुकट वि सजदा,

शिव जी डमरू तेरा आज डम डम वजदा,

पी के भंग प्याला भोला विच मस्ती दे आया,

तांडव तेरा शम्भू नाथ जी तीनो लोक से छाया,

काकोवाल दा मणि वि तेनु त्रिकोली सददा,

शिव जी डमरू तेरा आज डम डम वजदा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।