सपनो मैं तू अपनों में तू

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सपनो मैं तू अपनों में तू देखु जिधर तू ही तू है,

सांसो एम् तू धरकन में तू रग रग में तू है समाया,

कान्हा मेरे कान्हा आजा अब तो आजा,

फेरता हु नजरे जिधर तू ही तू आये नजर,

छोड़ तुझको सँवारे बोलो मैं जाऊ किधर,

फूलो में कलियों में चारो तरफ तेरी माया,

सपनो मैं तू अपनों में तू

चाहे धरती हो आस्मां सबमे तेरा ही वास है,

हारे का सहारा है तू मेरा ये विश्वाश है,

तू ही मेरा मैं हु तेरा सब में है तेरी ही छाया,

सपनो में तू अपनों में तू ......

श्याम कहे जब गाउ मैं बांसुरी बजाता है तू,

प्यारी प्यारी धुन पे तेरी सबको नचाता है तू,

देखा मैंने सारा जहां इस दिल को बस तू ही बाया,

सपनो मैं तू अपनों में तू

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।