नैना का बाण मत न मारो संवारा धनि

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नैना का बाण मत न मारो संवारा धनि,

संवारा धनि महारे थिए पे बने,

नैना का बाण मत न मारो....

बांकी लचक थारी बांके बिहारी,

नैन कटारी आइए खेज के मारी,

निजरासु श्याम चोंकि निजरा लड़ी,

नैना का बाण मत ना मारो संवारा धनि,

जिमे तो आवे थाने नैना में समा लू,

नैना के रस्ते थाने हिये में वसा लू,

हिवड़े की प्यास बाबा मोकळी बड़ी,

नैना का बाण मत ना मारो संवारा धनि,

जीव जरानो थी बाण पुराणी हर्ष भगत थारी प्रीत पहचानी,

भगता में श्याम थी निजरा पड़ी,

नैना का बाण मत ना मारो संवारा धनि,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।