ये दिल की दास्तां

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ये दिल की दास्तां होठो पे आई सांवरे सुन लो,

दुखो की मार से आँखे भरई सांवरे सुन लो,

हमारी लाज है गिरवी क्या बैठे देखते हो तुम,

क्या पानी है मेरे आंसू क्यों कुछ न बोलते हो तुम,

ज़माने में हुई है अब हसाई सांवरे सुन लो,

ये दिल की दास्तां.....

जिधर भी देखता हु मैं अँधेरा ही अँधेरा है,

मैं खुद से हार बैठा हु निरशा और अँधेरा है,

हमारे दिल में न है अब समाई सांवरे सुनलो,

ये दिल की दास्तां

दयालु हो कन्हैया तुम दया मुझपे करदो ना,

कहे मोहित मेरी झोली प्रभु खुशियों से भर दो न,

प्रभु हमने भी ये अर्जी लगाई सांवरे सुन लो,

ये दिल की दास्तां

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।