नचदी टपदी वृंदावन जानी हाँ मैं

पूनम यादव
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नचदी टपदी वृंदावन जानी हाँ मैं,

अपने बांके दी ख़ास दीवानी हां मैं,

श्याम सलोना मेरा दुनिया तो वख है,

बांके बिहारी नाल लड़ी मेरी आँख है,

प्यारे प्रीतम दा प्यार पानी हां मैं,

मुरली वाले दी खास दीवानी है मैं.....

तन मन किता मैं ता श्याम हवाले,

हर दुःख विच मैनु आप सम्बाले,

तहियो कान्हा दी ख़ास दीवानी हां मैं

नचदी टपदी वृंदावन जानी हाँ मैं...

बांके बिहारी दी शोभा है न्यारी,

कमल कपिल पूरी जान बलिहारी,

चल पूनम दा वस् दिखी जानी आ मैं,

नचदी टपदी वृंदावन जानी हाँ मैं,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।