दर पे बुला लिया अपना बना लिया

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॥ पावन पाठ ॥

दर पे बुला लिया अपना बना लिया,

बिगड़ी मेरी तकदीर को तूने बनाया है,

दर छोड़ कर तेरा कही ना और जाना है,

हमें अपना बना लो जय गुरु जी,

चरणों से लगा लो जय गुरु जी,

आते रहे संदेसे मुझे कितने सालो से,

उलझा रहा मैं हर दाम अपने खयालो में,

सच्चा तेरा दरबार है दर्द ज़माना है,

दर छोड़ कर तेरा कही न और जाना है,

हमे अपना बना लो....

तू ही मेरा मात पिता है तू ही दाता है,

सिमरण तेरा वाहेगुरु यही करना आता है,

तेरे चरणों में ही अब परनाम ठिकाना है,

दर छोड़ कर तेरा कही न और जाना है,

हमे अपना बना लो....

धरती पर स्वर्ग अदि तो गुरूजी का द्वारा है,

गुरुवर मेरा सारे जगत मैं सबसे न्यारा है,

गुरुवाणी का हर एक शब्द अनमोल खजाना है

दर छोड़ कर तेरा कही न और जाना है.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।