सपने में मेरी इन आँखों ने

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॥ पावन पाठ ॥

सपने में मेरी इन आँखों ने दरबार निराला देखा है,

बेठा सिंगासन पर मैंने वो शिर्डी वाला देखा है,

इक भीड़ लगी थी लोगो की चरणों में झुके थे सिर सबके,

आशीष सभी को देते हुये एक हाथ निराला देखा है,

सपने में मेरी इन आँखों ने दरबार निराला देखा है,

चल पड़े अपाहिज किरपा से गुंगो ने भजन सुनाये है,

अन्धयारी आँखों में मैंने फिर हुआ उजाला देखा है,

सपने में मेरी इन आँखों ने दरबार निराला देखा है,

कहते है इन्हें साईं जी ये बड़े दयालु भगवन है,

इक पल में सारे कष्टों को ये हरने वाला देखा है,

सपने में मेरी इन आँखों ने दरबार निराला देखा है,

ये देख नजारा साईं जी अजनबी तुम्हारा दास हुआ,

एह दुनिया वालो लो हमने सबका रखवाला देखा है,

सपने में मेरी इन आँखों ने दरबार निराला देखा है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।