लो फिर आई है गुरु पूजा

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॥ पावन पाठ ॥

शंख वजाये शीश झुकाये लो फिर आई है गुरु पूजा,

साई शरण में झुकते जाये लो फिर आई है गुरु पूजा,

कोई ना अपना सब बेगाने,

सब को देखा सब को परखा,

बड़ी मुश्किल से हम समजे है जग है अगनि साई है बरखा,

ख्वाब सबको ये समजाये लो फिर आई है गुरु पूजा,

शंख वजाये शीश झुकाये लो फिर आई है गुरु पूजा,

साई सहारे हम को मिला है,

हर सुख मन का हर सुख तन का,

खुलते जाये बंद दरवाजे हल पाया है हर उल्जन का,

दूर हुई है हर चिंताये लो फिर आई है गुरु पूजा,

शंख वजाये शीश झुकाये लो फिर आई है गुरु पूजा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।