ये बोली सी सूरत

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ये बोली सी सूरत ये बांकी अधाये,

मेरे श्याम तुमने क्या जादू चलाया,

ते त्रिशि निगाहो के तीर चलना,

बता दे हुनर ये कहा से है पाया,

ये बोली सी सूरत ये बांकी अधाये,

मेरे मन में कब वस् गये,

मुझे कुछ नहीं है पता,

मुझे जिसने वश में किया,

यही है वो तेरी अधा,

ये होठो पे मुश्कान ये गालो में गेसू,

तेरा ये तिलश मना कोई जान पाया,

ये बोली सी सूरत ये बांकी अधाये,

निगाहो से घायल करे निगाहे मिलाउ मैं क्या,

हटाए न एक पल हटे,

निगाहे हटाउ भी क्या,

मैं दुब चूका हु सलोनी छवि में,

ना सोचा कभी क्या खोया क्या पाया,

ते त्रिशि निगाहो के तीर चलना,

बता दे हुनर ये कहा से है पाया,

तेरे जाल में फस गया निकालो मुझे अब ज़रा ,

तेरे प्यार में लूट गया संभालो मुझे अब जरा,

तेरी इस अदा पे मैं कुर्बान जाऊ,

कहे हर्ष तुमने दीवाना बनाया,

ये बोली सी सूरत ये बांकी अधाये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।