जल बरसे भीगे जटा धारी जल बरसे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जल बरसे भीगे जटा धारी जल बरसे,,

हो जल बरसे भीगे जटा धारी,

गोरा ने भगिया में घोटा लगाया,

पीमे भोले के सब यार, भोले जी तरसे,

जल बरसे......

बेल धतूरे का भोग लगया,

खामे भोले के यार, भोले जी तरसे,

जल बरसे.........

कैलास पर्वत पे आसन लगाया,

सोवे नागियाँ नाथ, भोले जी तरसे,

जल बरसे.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।