भोले गौरा को ब्याहने आया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले गौरा को ब्याहने आया ,

बड़ा विकराल रूप बनाया,

गले में सर्पो की माला,

तन पे है मृग छाला,

भोले बाबा ने ढोंग रचाया,

बड़ा विकराल रूप बनाया,

भोले गौरा को व्याहने आया...

हाथ डमरू लिए,रंग काला किए,

शिव सम्भु ने डमरू बजाया,

बड़ा विकराल रूप बनाया

भोले गौरा को व्यहने आया

संग में भूत लिए,ढंग निराला किये,

भूतो ने शोर मचाया,बड़ा विकराल रूप बनाया

भोले गौरा को व्यहने आया,

होके नन्दी पे सवार,शिव शंकर चले,

रुद्रो ने शंक बजाया, बड़ा विकराल रूप बनाया

भोले गौरा को व्यहने आया,

नर नारी डरे,किलकारी भरे,

बच्चों ने शोर मचाया,बड़ा विकराल रूप बनाया

भोले गौरा को व्यहने आया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।