करूणा निधान कान्हा जगत क दाता हयीं

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

करुणा निधान कान्हा जगत क दाता हयीं,

देव ऋषि मुनि गावैं,

ब्रह्मा शिव हिंय धरि ध्यावैं,

वेद पुराण कान्हा जगत क दाता हयीं,

करुणा निधान कान्हा जगत क दाता हयीं.....

त्रेता क राम हयीं रऊआं,

द्वापर क श्याम हयीं रऊआं,

श्री भगवान कान्हा जगत क दाता हयीं,

करुणा निधान कान्हा जगत क दाता हयीं....

दीनन क दीन बंधू,

भक्तन क कृपा सिंधू,

कृपा निधान कान्हा जगत क दाता हयीं,

करुणा निधान कान्हा जगत क दाता हयीं.....

नईया प्रभु पार लगावँ,

सब पर कृपा बरसावँ,

अद्भुत महान कान्हा जगत क दाता हयीं,

करुणा निधान कान्हा जगत क दाता हयीं ....

आभार: ज्योति नारायण पाठक

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।