एक है जग का बाज़ीगर

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॥ पावन पाठ ॥

एक है जग का बाजीगर,ये राज़ सभी ने जाना है ॥

किस देश का रहने वाला है,कोई वेश नही पहचाना है॥

वो रास रंग को क्या जाने,वो खुद ही रास रचाता है ॥

अपने ही प्यारो के पथ पर,दुनिया को नाच नचाता है ॥

उसका कोई दीवाना नही अपने आपका वो दीवाना है ॥

किस देश का.....

कोई एक है.....

अल्लाह है यही मौला है यही भगवान यही कहलाता है ॥

किसी एक का ये मालिक नही,हर किसी से इसका नाता है ॥

ये मंदिर मस्जिद गिरजाघर ये तो बस बहाना है ॥

किस देश का.....

कोई एक है..

ये ही तो गम देता सबको,ये ही खुशियां भी देता है ॥

ये ही तो धन और दौलत दे,और ये ही छीन भी लेता है ॥

वो लुटता है हम लूटते है,उसको किसी ने ना पकड़ा है ॥

किस देश का......

कोई एक है....

ये ही है दिल में बसा हुआ,और ये ही दिल में छिपा हुआ है ॥

इनका तो बस कुछ भी हाथ नही, जब डोर है इसके हाथो में ॥

इंसान का काम नाचना है,औऱ इसका काम नचाना ॥

किस देश का...........

कोई एक है...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।