मेरी लगी मईया संग प्रीत

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी लगी मईया संग प्रीत, दुनियाँ क्या जाने ll

क्या जाने कोई क्या जाने ll

मेरी लगी मईया संग प्रीत,,,,,,,,,,,,,,,,,

छवि लखी मैंने माँ की जब से

हुई बावरी मैं तो तब से

बाँधी प्रेम की डोर मईया से

नाता तोड़ा मैंने जग से

ये कैसी lll, निराली प्रीत, दुनियाँ क्या जाने

मेरी लगी मईया संग प्रीत,,,,,,,,,,,,,,,,,

मईया की सुन्दर सूरतिया

मन में बस गयी माँ की मूरतिया

जब से ओढ़ी लाल चुनरिया

लोग कहे मैं भई रे बावरिया

मैंने छोड़ी lll, जग की रीत, दुनियाँ क्या जाने

मेरी लगी मईया संग प्रीत,,,,,,,,,,,,,,,,,

हर दम अब तो रहूँ मस्तानी

लोक लाज दीनी बिसरानी

रूप राशि अंग अंग समानी

हेरत-हेरत रहूँ दीवानी

मैं तो गाऊँ lll, ख़ुशी के गीत, दुनियाँ क्या जाने

मेरी लगी मईया संग प्रीत,,,,,,,,,,,,,,,,,

निस दिन तेरी ज्योत जगाऊँ

भक्ति करूँ माँ के गुण गाऊं

मन चाहा फल माँ से पाऊं

मेरी भक्ति lll, मेरा मन मीत, दुनियाँ क्या जाने

मेरी लगी मईया संग प्रीत,,,,,,,,,,,,,,,,,

अपलोड कर्ता- अनिल भोपाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।