संवारिये का शृंगार करे गे

पारंपरिक
श्री कृष्ण आरती खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आओ भगतो चले सँवारे के द्वार,

लेके फूल माला और हार संवारिये का शृंगार करे गे,

ग्यारस आई सजा श्याम का दरबार,

चलने को हो जाऊ त्यार संवारिये का शृंगार करे गे,

चम्पा चमेली जूही मोगरा गुलाब लो,

रजनी गन्दा और गेंदा फूल लाजवाब लो,

फूलो से श्याम जी को आज हम सजाये गे,

आरती उतरे गे और छप्पन भोग लगाए गे,

लेके दिल में अपने श्रद्धा अपार,

चलो श्याम धनि के द्वार संवारिये का शृंगार करे गे,

सोना न चांदी चाहे हीरे ना मोती,

श्याम सँवारे को भाये जेवर न कोई,

फूलो की चाह उन्हें फूलो से प्यार है,

पुष्पों से ठाकुर का होता शृंगार है,

फूल सुगणदित लाओ लाओ खुशबु दार,

लेके जाऊ सँवारे के द्वार संवारिये का शृंगार करे गे,

चलने को हो जाऊ त्यार संवारिये का शृंगार करे गे,

जैकारो से गूंज उठी खाटू की नगरी,

भक्तो ने गाई है जब बाबा की आरती,

छप्पन भोगो का जब के वितरण हुआ है,

खाके परशाद मगन सबका मन हुआ है,

सबने मन शीश दानी का आभार,

करके श्याम जी को नमस्कार संवारिये का शृंगार करे गे,

चलने को हो जाऊ त्यार संवारिये का शृंगार करे गे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।