घर दे न मुकने कम वे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

घर दे न मुकने कम वे चल वृद्धावन चलिए,

वृद्धावन चलिए बरसाने चलिए,

भजन बिना न सारी ज़िंदगी लंगा लई,

कुज रह गई कुज दुख ने खा लाई,

किसे काम आणि न चम् वे चल वृद्धावन चलिए ,

घर दे न मुकने कम,.......

गिन गिन मनके माला फेरे,की आउ दस ठाकुर तेरे,

छड़ चतुराइयाँ ला ले मन वे चल वृद्धावन चलिए ,

घर दे न मुकने कम,.......

दौलत जुड़ जाऊ शोरत जुड़ जाऊ,

किती करवाई सारी खु विच रुड जाऊ,

लेन जदो आ गए याम वे चल वृद्धावन चलिए ,

घर दे न मुकने कम,.......

बांके बिहारी जी दा दर्शन जे पाना,

श्री हरिदासी कोलो लेला सिरनामा,

संता दे फड़ लाई चरण वे,

चल वृद्धावन चलिए ,

घर दे न मुकने कम,.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।