उड़ जा काला कागला संवारियो आवे रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

उड़ जा काला कागला संवारियो आवे रे,

बाबा को लयादे रे सन्देश वावला,

उड़ जा काला कागला.....

काली काली पाखा तेरी मोर सी रंगाऊ रे,

सोनी ने भुला के तेरी चोंच मंडवाउ रे,

खीर मैं ख्वाऊ रे खीर मैं ख्वाऊ रे,

खीर मैं ख्वाऊ जी मन भात भात रा,

उड़ जा काला कागला....

संवारियो मिजाजी म्हारो जागे है के सुते है,

साँची तू बता दे वो के भगता ने भूले रे,

बेगोजा सुना दे रे,सन्देश बावरा,

उड़ जा काला कागला

भगत अनोखा तेरा तू भी है अनोखो रे,

झोली भर जावे जो तू लागे चोखो चोखो रे,

लेहरी उदीका रे लहरी उदीका रे दिन रात संवारा,

उड़ जा काला कागला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।