बड़ियाँ रोनका लगियां

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

भवन भुला दे नाल सजाया,

दर ते भारी मेला लगाया,

पता न केहड़ी केहड़ी था तो भर भर आइयाँ गाड़ियाँ,

मैया जी तेरे मंदिरा ते बड़ियाँ रोनका लगियां,

नचदे नच्दे दर ते आंदे बोलन भगत जयकारे,

सची तेरी ज्योत दे पेंदे दूर दूर लिशकारे,

रंग बिरंगियाँ लाइटा वालियां लड़ियाँ वि ने लगियां,

बड़ियाँ रोनका लगियां,......

आज माँ तेरे बचियाँ नु तेरे नाम दी चडी खुमारी,

दर ते पेन धमाला संगत रल के आई सारी,

दर्शन तेरा पौन ली आज लमियाँ लाईना लगियां,

बड़ियाँ रोनका लगियां....

सलीम तेरियां भेटा बोले ढोल नगाड़े भजदे,

साह रंग दे वि नैन भवन वाल देख देख नही रज दे,

दगापुरियां सुनील ने वि तेरे ते डोरा छड़ियाँ,

बड़ियाँ रोनका लगियां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।