दान देते नहीं आप जो अपना सिर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दान देते नहीं आप जो अपना सिर,

द्वार खाटू का पावन ये सजता नहीं,

दीन दुखियो की झोली न भरती अगर,

तेरी चौकठ पे मेला यु लगता नहीं,

नाम सुन कर तेरा लोग मुड़ने लगे,

तेरे चरणों में आकर के जुड़ने,

कुछ तो हाथ बात तुझमे मेरे सांवरे,

नाम कोई किसी का यु भज ता नहीं,

दान देते नहीं आप जो अपना सिर

हर तरफ एक चर्चा यही आम है,

खाटू जैसा नहीं दूसरा धाम है,

जो सहारा न बनता गरीबो का तू,

तो तेरे नाम का डंका भजता नहीं,

दान देते नहीं आप जो अपना सिर

फूल मुरझाया यही पर खिला,

जो यहाँ मिल गया वो कही ना मिला,

बेधक् हाथ जो तुम पकड़ ते नहीं,

तो ये गूंजा का सिर दर पे झुकता नहीं,

दान देते नहीं आप जो अपना सिर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।