मेरे दिल दी गल तू सुन सजना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे दिल दी गल तू सुन सजना,

असा प्रीत तेरे नाल लाई होइ है,

तेरे सोहने सोहने मुखड़े तो,

ज़िन्द्जान भी असा लुटाई होइ आ,

असी दिल दे अंदर सोहनिया वे तेरा सूंदर रूप सजाया है,

असा दुनिया कोलो की लेना असा दुनिया दिलो भुलाई होइ है,

मेरे दिल दी गल तू सुन सजना,

तेरे सोने नूर नजारा तो मस्ती दा प्याला मिलदा है,

तेरा सोना मुखड़ा तक तक के मेरा रोम रोम भी खिल्दा है,

असि मस्ती न पाके मनमोहियाँ असी होश भी दिलो भुलाई होइ है,

मेरे दिल दी गल तू सुन सजना,

मेरी खली झोली जन्मा दी मेरे प्यारे नु भी भर देना,

असी होर कुछ नहीं मंगना एह अपने रंग विच तू रंग लेना,

मेरी लगी होइ तोड़ निभा पल पा वि मैनु फड़ आई होइ आ,

मेरे दिल दी गल तू सुन सजना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।