आशा रख पगली वो आयेंगे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

क्यों धीरज खोये जाती है वह आयेंगे आयेंगे,

आशा रख पगली वो आयेंगे,

हरी आयेंगे हरी आयेंगे,

आशा रख पगली वो आयेंगे,

हर अदा निराली शान लिए,

अंदाज भरी पहचान लिए,

कुछ सुंदरता का मान लिए,

तेरी नखरो के तूफ़ान लिए,

हस्ते हस्ते दिल छीने गे,

भूली हुई याद दिलाएंगे,

आशा रख पगली वो आयेंगे.....

मैया होगी लोरी होगी,

माखन होगा चोरी होगी,

कारे होंगे गोरी होगी,

छीना झपटी जोरि होगी,

गलियों में माखन बिखरे गा,

मेरे ग्वाले मौज मनाये गे,

हरी आयेंगे हरी आयेंगे,

आशा रख पगली वो आयेंगे,

मटकी लुढ़काई जाए गी,

चुनरी छिटकाई जाएगी,

सब लोक लाज बह जायेगी,

फिर ग्वालिन दांत दिखाई गी,

मुरली की मीठी तनो से मनमोहन उन्हें मनाये गे,

आशा रख पगली वो आयेंगे,

हरी आयेंगे हरी आयेंगे,

एक दिन ऐसा अवसर होगा,

मेरा साजन घर पर होगा,

विरहा का एहि असर होगा,

प्यारे का प्यार अमर होगा,

मैं हरी चरणों से लिपटु गी,

छाती से मुझे लगाए गे,

हरी आयेंगे हरी आयेंगे,

आशा रख पगली वो आयेंगे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।