थारी जय हो भोलेनाथ

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

थारी जय हो भोलेनाथ, में वारी जाऊ चरणा में,

जटा बीच में गंगा थारे,

भांग धतुरा पिने वारे,

तुम त्रिलोकी नाथ ,

में वारी जाऊ चरणा में,

प्रर्वत उपर थारा धुना रमता,

डमरू प्यारा डम डम बजता,

तु भक्तों के साथ ,

में वारी जाऊ चरणा में,

माथे उपर चंदा साजे,

नंदी बैल तेरे संग राजे,

गोरा मां है साथ ,

में वारी जाऊ चरणा में

हम सब तेरा ध्यान लगावे,

संदीप कुमार तेरा गुण गावे,

मेरे सर पे रखियो हाथ,

में वारी जाऊ चरणा में

संदीप स्वामी

खिजुरीवास,अलवर(राज०)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।