चस्का एक तेरी यारी का

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

खाटू वाले श्याम धनि मने चस्का एक तेरी यारी का,

ना ते मने चेतक चाहिए जी ना ही चस्का लाल फर्रारी का,

मैं सीधा साधा जाट सु बाबा तने मिलन आया सु,

ना माँगन ताहि आया बाबा दर्शन खातिर आया सु,

तू बिन बोले ही देदे है सुन रखाया है दिल दारी का,

ना ते मने चेतक चाहिए जी ना ही चस्का लाल फर्रारी का,

मेरे खेत में तेरी रेट में कोई घना फर्क न हो रा से,

मेरा खेत तेरा रेट दोनों बाबा हरा भरा ही हो रहा से,

ना कर्जा कर मने कमाना इजात दरी का,

ना ते मने चेतक चाहिए जी ना ही चस्का लाल फर्रारी का,

तेरे खातिर थोड़ी मिठाई बाबा घर से लेकर आया हु,

घर का बेसन और देसी घी मिलवा कर लाया सु,

भोग लगा ले मेरे सांवरियां मने मजा सा आ जाये यारी का,

ना ते मने चेतक चाहिए जी ना ही चस्का लाल फर्रारी का,

तेरे दर्शन करके यु लगाया जैसे गंगा जी में नहा लिया जी,

मित्तल के संग जाके बाबा हारे हारे गा लिया जी,

के करना मैं इब बाबा इस झूठी यारी का,

ना ते मने चेतक चाहिए जी ना ही चस्का लाल फर्रारी का,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।