आजा भोले नाथ साथ में

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आजा भोले नाथ साथ में मिलके रंग जमावांगे

में घोटुंगा भांग नाथ फिर पीके धुम मचावांगे

तेरे भक्त की चौधर कितनी भोले में सबने दिखा दुगा

नीलकण्ठ पे एसी आली दो गाड़ी भिजवा दुगा

रस्ते में तेरे खाण पिन ने टैंंट सकडौ ला दुगा

नीलकंठ पे होंगे फिर खांंदे पींदे आवांगे- में घोटुंगा भांग

कुंडी सोटै भोले नाथ मैने कद के लाके धर राखे

दुध दही के फरमा भी मैने घी के पीपे भर राखे

घास नांदिया की खातिर मैने चार बरिंडे भर राखे

पहाडा ने जा भुल भोले आपा इत ही मौज उडावांगे- में

सत्तर किले भांग भोले मेंं ताजी रोज पिलाउंगा

रगड -2 के कुंड में फिर निखडु दूध मिलाउंगा

बैठे तेरे चरणों में भोले घोट -2 के प्याउंगा

चले खेत मेंं नहर भोले आपा कुद -2 के नहावांगे- मे

तावल करके आजा भोले देखु सु तेरी बाट कती

सारी तैयारी कर राखी में ल्यादुंगा तेरे ठाठ कती

कर्णसिंह तेरा भक्त कसुता नही किसी ते घाट कती

तु भोला में दिल का भोला फिर दोनो मैल मिलावांगे-

में घोटुंगा भांग नाथ फिर पिके

संदीप स्वामी

खिजुरीवास, अलवर (राज०)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।