मैया दे नवरात्रे आ गए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सारे रल मिल बोलो जयकारे, के मैया दे नवरात्रे आ गए,

जय हो, मैया दे नवरात्रे आ गए।

चलो इकठे हो के मैया दे द्वारे, के मैया दे नवरात्रे आ गए,

जय हो, मैया दे नवरात्रे आ गए॥

तोड़ो तोड़ो नी गुलाब, चंबा, मडुआ, नी फुल्लां वाले हार गुन्दने।

साडे नालो वडभागी वो फुल हैं जिन्ना ने माँ दे पैर चूमने।

होण सारे गम दूर, होवे दिल भरपूर,

चलो भावना दे वेखीए नज़ारे जो संगतां दे मन भा गए॥

एक हाथ विच फड के माँ खंडा, माँ शेर दी सवारी करदी।

देवे सजा ओहो पापीया नु भारी, ते भगतां दे दुःख हरदी।

जा के मैया जी दे दर सीस चरना च धर,

ओहदे करते गुनाह माफ़ सारे जो मैया जी दे गुण गा गए॥

मेरी भोली माँ दे नेत्र सुनहरी ते सर उत्ते ताज सजदा।

लाल चुन्नी उत्ते गोटे दी किनारी, के बाणा किन्ना सोहना लगदा।

ओहदे करीए दीदार, जो है सच्ची सरकार,

लखां तर गए लखां ने तर जाना, जो मैया दा दीदार पा गए॥

देखो भावना दी शान निराली, के सोहने सोहने चन्डे झुल्दे।

योगी हो गया मैया दा तन मन तो, के भाग ओस दिन खुल्दे।

जोवी मांगना है मांगो, मैया रानी तो ना संगो,

देखो रेहमता दे डूंगे डूंगे सागरां च ‘करमा’ ते ‘नूर’ आ गए॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।