नर की शोभा हैं नारी

पारंपरिक
श्री राम भजन दुर्गा भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

नर की शोभा हैं नारी,

नारी से दुनिया हारी,

नारी से देवता हारे ब्रह्मा विष्णु त्रिपुरारी,

नारी से हारे दानव नारी को हारे पांडव,

हारे यमराज नारी से नारी ना हारी,

नर की शोभा हैं नारी...

नारी ने नारी को चदा कर राम को वन भिजवाया,

उसको जरा तरस ना आया,

एक नारी ने चोदा वर्ष तक पति का साथ निभाया,

एक ने पानी पिया न कुछ खाया,

नारी नर से बड़ी नारी हरी से लड़ी,

नारी से हारे नारद नारी न हारी,

नर की शोभा हैं नारी...

नारी ने इतना समजाया नारी की ना मानी,

था वो कौन पुरष अभिमानी,

नारी की यो बात न माना की उसने मन मानी,

उसने बैर राम से ठानी,

पुत्र मर वा दिए भाई मिट वा दिए,

नारी की खातिर वो जल गई लंका वो सारी,

नर की शोभा हैं नारी.....

नारी की जो कदर न करता वो नर नर नरक में जाता नारी घर की लक्ष्मी माता,

नारी का अपमान जो करता सुख वो कभी ना पाता,

नारी बेटी बेहन है माता नारी ममता मई ,

राही लिखते सही नारी की पूजा करती दुनिया ये सारी,

नर की शोभा हैं नारी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।