जागो हे जगदम्बे जागो हे ज्वाला

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जागो हे जगदम्बे जागो हे ज्वाला,

जागो हे दुर्गे माँ, जागो प्रित्पाला।

भगत जानो ने तेरे दर पे डेरा डाला,

जागो माँ जागो, माँ जागो॥

जागो तुम्हारे भगत तुमको जगाएं,

आवो माँ लाल तुम्हे रो रो बुलाएं।

ज्वाला है नाम तेरा, तेज है निराला,

जागो माँ जागो, माँ जागो॥

जागो दिलों के अन्धकार को मिटा दो,

भटके हुए को माँ रौशनी दिखा दो।

अपनी ही ज्योति का कर के उजाला,

जागो माँ जागो माँ जागो॥

सारा ज़माना हुआ ज्योत का दीवाना,

मैया हम चरणों में मांगे ठिकाना।

जिस पे तेरी नज़र मैया उसका बोलबाला,

जागो माँ जागो माँ जागो॥

शेर पे सवार माँ अष्ट भुजा वाली,

दुष्टों की काल मैया भक्तों की रखवाली।

नैयनो में तेज तेरे गले मुंडमाला,

जागो माँ जागो माँ जागो॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।