बेटे का सम्मान है जग में बेटी का कोई मान नहीं

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॥ पावन पाठ ॥

बेटे का सम्मान है जग में बेटी का कोई मान नहीं,

दुनिया वालो मुझको बता दो बेटी क्या संतान नही,

बेटा क्या यहाँ लेकर आया बेटी क्या नही लाइ है,

बिन बेटी के दुनिया वालो सुनी पड़ी कल्हाई है,

रक्षा बंधन भईया दूज का बिकुल तुमको ध्यान नही,

दुनिया वालो मुझको बता दो बेटी क्या संतान नही

बेटा तारे एक कुल को बेटी तीन को तारती है,

मात पिता नाना नानी के सपनो को ये सवारती है,

बिन बेटी के दुनिया वालो होता कन्यादान नही,

दुनिया वालो मुझको बता दो बेटी क्या संतान नही

बेटा साथ छोड़ भी देगा बेटी साथ न छोड़े गी,

छोड़े गी वो जिस दिन नाता दो रिश्तो को तोड़े गी,

बेटी को ठुकराने वाला वो इंसान इंसान नही,

दुनिया वालो मुझको बता दो बेटी क्या संतान नही

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।