साची गल सुनी है साईं सुल्तानी है मेरा

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॥ पावन पाठ ॥

साची गल सुनी है साईं सुल्तानी है मेरा,

चाहे कोई कुछ भी बोले साईं भगवान है मेरा,

सारी दुनिया छोड़ के मैंने तुझको पाया,

तूने भटके हुए को साईं दर पे भुलाया,

कभी नही भूलू गा न भूलू गा साईं एहसान है तेरा,

चाहे कोई कुछ भी बोले साईं भगवान है मेरा,

दुनिया मुझको जाने तेरे नाम से ही पहचाने,

चाहे बने कहानी या बन जाये अफसाने,

साईं मेरा दाता है येही रहमान है मेरा,

चाहे कोई कुछ भी बोले साईं भगवान है मेरा,

सर आँखों पे बिठाओ तेरे घर में जो भी आये,

साईं येही बोले बाबा येही बोले,

ये तो मेहमान है मेरा,

चाहे कोई कुछ भी बोले साईं भगवान है मेरा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।