कान्हा रे कान्हा

बाबा रसिका पागल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा रे कान्हा कान्हा रे कान्हा,

ओ मेरे कान्हा हे प्यारे कान्हा,

करले अर्ज मेरी मंजूर,कान्हा रे कान्हा

मुझे तलब है तेरे दीद की सुनले मुरली वाले,

सदियों से हु तेरा दीवाना अब तो गले लगा ले,

मुझसे क्यों तू इतनी दूर कान्हा रे कान्हा,

तोबा कर्ली दुनिया से अब पड़ा हु पीछे तेरे,

तेरे मेरे मेरे तेरे जनम जन्म के फेरे,

हु मैं दुनिया से मझ्बुर कान्हा रे कान्हा,

नूरे याहा आप हो प्यारे हम तेरे दीवाने,

तेरे है रह तेरे बन तू माने या ना माने,

सारे जग में हो मशहूर कान्हा रे कान्हा,

पागल तो कुर्बान हुआ है कर्ली तो संग यारी,

तेरी मेरी यारी है श्री राधा राषिक बिहारी,

तेरी मस्ती में राहु चूर कान्हा रे कान्हा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।