जय माँ सिद्धिधात्री

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नवमी का नवरात्र ही पूरण कराए काम।

सिद्धिधात्री रूप को करते सभी प्रणाम॥

चरुत्भूजी दर्शन दिया कमल पुष्प आसन।

शंख चक्र गदा लिए करती जग शासन॥

अमृत पद शिव को दिया अंग संग मुस्कान।

सब के कष्टों को हरो देकर भक्ति ग्यान॥

दिखलाती हो आप ही सूर्य चन्द्र आकाश।

देती सभी दिशाओं को जल वायु प्रकाश॥

वरद हस्त हो आपका सुख समृधि पाए।

इधर उधर ना भटकूँ मैं मुझ को भी अपनाए॥

नवरात्रों की माँ कृपा करदो माँ।

नवरात्रों की माँ कृपा करदो माँ॥

जय माँ सिद्धिधात्री।

जय माँ सिद्धिधात्री॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।