कान्हा रे कान्हा रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा रे कान्हा रे तोहरे बिन लगे नही मोहरा जीया रे,

नैनो ने कैसा जादू किया रे तोहरे बिन लगे नही मोहरा जीया रे,

हर पल तोहरी याद सतावे धग धग मोहरा ज़ी धड्कावे,

बिरही बंसुरिया बजिओ रे सांवरिया तोरे से मोही नैना लगे रे,

कान्हा रे कान्हा रे .......

गैयाँ तेरी तुज्को पुकारे मियाँ यशोदा तेरी राह निहारे,

चार दिन को कह के गियो रे बीते बर्ष ना आइयो रे,

कान्हा रे कान्हा रे .......

सुनी हो गी ब्रिज की गलियां ,

कांटे बन गी ब्रिज की कालिया,

कैसी ये प्रीत निभाई रे सांवरिया,

कहे तोहे मोरी सूद ना आई रे,

कान्हा रे कान्हा रे ....8421815181

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।