कन्हैया तोरी बंशी में सात छेद रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कन्हैया तोरी बंशी में सात छेद रे,

सात छेद सात रस सातों भेद रे,

कन्हैया तोरी बंशी में सात छेद रे,

कभी बोले सारेगामा कभी बोले मागरेस,

कभी बोले सुन राधा कभी बोले सुन मीरा,

कभी बोले गीता कभी चारो वेद रे,

कन्हैया तोरी बंशी में सात छेद रे,

कोई कहे कान्हा तोहे कोई नंदलाला,

कोई कहे नटवर कोई गोपाला,

कोई गिरधारी कोई काला मेघ रे,

कन्हैया तोरी बंशी में सात छेद रे,

भक्त सुदामा के पॉव पखारे,

और सत्यभामा के तुलसी पे हारे,

कंस के काल पुत्र बासुदेव के ,

कन्हैया तोरी बंशी में सात छेद रे,

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।