बड़ी दूर से मैं आया तेरे द्वार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बड़ी दूर से मैं आया तेरे द्वार सांवरे

सच कहु आया दुनिया से हार सांवरे,

मैंने सुना तेरा नाम दीना नाथ है,

मुझ दीं की बिगड़ी सवार सांवरे,

बड़ी दूर से मैं आया तेरे द्वार....

चिंतन में तेरे मेरा चित न लगे,

होठो पे उदासी छाई है जिस और नजर में फेरु प्रभु,

हर और से आफ़ात आई है,

मेरी ज़िंदगी की रहे अनजान है,

अपनी मंजिल की ना मुझे पहचान है,

मैं तो थक गया प्रभु अपने आप से,.

अब बन जा तू मेरा मदतगार सांवरे,

बड़ी दूर से मैं आया तेरे द्वार

विश्वाश करू किसपे मैं प्रभु विश्वाश को दीखते देखा है,

गेरो की शिकायत क्या मैं करू,

साया भी बदलते देखा है,

मेरे अपनों ने किया अपमान है,

मुझे अशाई का दिया ये इनाम है,

जिस प्यार को ये दिल बेक़रारा है,

उस प्यार का तू देदे उपकार सांवरे

बड़ी दूर से मैं आया तेरे द्वार

है खेल भरोसे का प्यारे,

मेरा ये भरोसा ना टूटे है डोर भरोसे की नाज़ुक,

हाथो से मेरे ये ना छूटे,

तेरे नाम का ही मुझपे सरूर हो,

इक बार मुलाकात भी जरूर हो,

तेरे मोहित की यही है प्राथना,

तेरा मनु गा मैं सदा आभार सांवरे,

बड़ी दूर से मैं आया तेरे द्वार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।