बिन पैसे संसार चले न

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बिन पैसे संसार चले न सुनो सांवरे गिरधारी पैसे की इज्जत बाहरी

पैसे से ही कुटुम का बिला पैसे की रिश्तेदारी,

बिन पैसे संसार चले न सुनो सांवरे गिरधारी,

क्या होगा आगे आगे ये समय आ गया है कैसा,

माना के भगवान नहीं पर उसे काम भी नहीं पैसा,

बिन पैसे के कदर करे न घर में बच्चे और नारी पैसे की इज्जत बाहरी

बिन पैसे संसार चले न सुनो सांवरे गिरधारी

जन्म से लेकर अंत समय तक पैसा बहुत जरुरी है,

इस कलयुग में पैसे के बिन जीना तो मज़बूरी है,

पैसा आज जरूत सबकी ऋषि मुनि या ब्रह्म चारि पैसे की इज्जत बाहरी

बिन पैसे संसार चले न सुनो सांवरे गिरधारी

सब कुछ पाकर भी इंसा हार जाये आगे पैसे के,

कब तक और कहा कहा पीछे भागे पैसे के,

इंसा की अब कदर नहीं और पैसा है सब पे बाहरी पैसे की इज्जत बाहरी

बिन पैसे संसार चले न सुनो सांवरे गिरधारी

भीम सेन कहे सुनो सांवरे पैसे में वो आकर्षण,

पैसे वालो को तो भगवन झट पट होते है दर्शन,

बिन पैसे तो पूजन अर्चन भजन भजन करे न पर तयारी पैसे की इज्जत बाहरी

बिन पैसे संसार चले न सुनो सांवरे गिरधारी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।